क्रिकेट सुपर स्टार महेंद्र सिंह धोनी का आज 39वां जन्मदिन है। रांची की गलियों से भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान तक धोनी ने एक लंबा सफर तय किया है। इनके बचपना से लेकर अभी तक के संघर्ष के बारे में आइए फीडबाबा के जरिए जानते है…

महेंद्र सिंह धोनी ने छोटे शहर से निकल कर क्रिकेट की दुनिया में जाकर उसकी बड़ी बड़ी बुलंदियों को छूने के लिए अपनी लाइफ में बहुत ही संघर्ष किया। आज वो जहां है वहां पर महेंद्र बेहद कठिनाई पूर्ण सफर तय करके आए है।

बता दें, महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम पान सिंह है, जो कि अल्मोड़ा जिले के तलासलाम गांव के रहने वाले थे। इनके पिता नौकरी की तलाश में लखनऊ चले गए। उसके बाद कुछ समय बिहार रहकर रांची आ गए जहां वे MECON में जूनियर मनगेमेंट पोजीशन पर नौकरी करने लगे।

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को हुआ था। महेंद्र सिंह धोनी के एक बड़ा भाई नरेंद्र और एक छोटी बहन जयंती है। धोनी ने अपने बचपन में काफी संघर्ष किया। उनका परिवार एक कमरे के मकान में रहता था।

गोलकीपर से बने क्रिकेटर

धोनी शुरुआत में अपनी फूटबाल टीम के गोलकीपर थे और अपने कोच की सलाह पर वे क्रिकेट में आ गए। अपनी शानदार विकेटकीपिंग के जरिए उन्हें एक लोकल क्रिकेट क्लब (कमांडो क्रिकेट क्लब) में खेलने का मौका मिला जहां पर वह 1995 से लेकर 1998 तक खेलते रहे। धोनी ने वीनू मांकड़ अंडर 16 चैंपियनशिप में बेहद शानदार प्रदर्शन दिखाया। धीरे-धीरे वे बिहार रणजी टीम का हिस्सा बन गए।

साल 2001 में उन्होंने पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकेट कलेक्टर की सरकारी नौकरी की, ये पल उनके लिए बेहद कठिन था, क्योंकि उनका असली सपना क्रिकेट में जाना ही था। सरकारी नौकरी छोड़कर धोनी क्रिकेट की ओर चल पड़े। फिर साल 2003 में उन्हें INDIA A टीम में चुन लिया गया, जो कि उनके लिए बेहद खास पल था। साथ ही वो त्रिकोणीय सीरीज खेलने केनिया भी गए, जहां उनके सामने पाकिस्तान की टीम थी।

इस सीरीज में धोनी ने अपना शानदार प्रदर्शन किया। घरेलु क्रिकेट में भी वे शानदार प्रदर्शन करते रहे जिसके चलते 2004/05 में उन्हें बांग्लादेश जाने वाले टूर में शामिल कर लिया गया, मगर वो अपने पहले ही मैच में दुर्भाग्य से शून्य पर रनआउट हो गए।

T-20 वर्ल्ड कप 2007

पहली बार कप्तानी करते हुए पहले टी-20 वर्ल्ड कप को जीतने में कामयाब रहे। जिसके इनाम के तौर पर बीसीसीआई ने उनके कांट्रैक्ट को बी से ए ग्रेड कर दिया और उन्हें ओडीआई टीम का कप्तान भी बना दिया, क्योंकि इस वक्त यानि की साल 2007 के 50-50 वर्ल्ड कप से खफा राहुल द्रविड़ कप्तानी छोड़ चुके थे। इसी तरह 2008 में अनिल कुंबले के टेस्ट से सन्यास के बाद उन्हें फूल टाइम कप्तान बना दिया। उन्होंने बेहतरीन कप्तानी निभाते हुए पहली बार इंडिया को टेस्ट रैंकिंग में नं.1 बनाया। महेंद्र सिंह धोनी को साल 2007 के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल-रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

वर्ल्ड कप 2011-

धोनी की कप्तानी का सबसे यादगार लम्हा 2011 का 50-50 वर्ल्ड कप रहा। जब उन्होंने मेजबान टीम होने के नाते वर्ल्ड कप को जीता।

चैम्पियन ट्रॉफी- 2013

साल 2013 में धोनी ने चैम्पियन ट्रॉफी जीतकर वर्ल्ड क्रिकेट के तीनों खिताबों को जीतने वाले दुनियां के एकमात्र कप्तान बनने का गौरव पाया।

टेस्ट से सन्यास

धोनी ने ढलते उम्र में क्रिकेट की रंगीन फोरमेंट पर ही पूरा फोकस करने के लिए व्हाइट ड्रेस क्रिकेट से 2014 को सन्यास ले लिया।

कई दिग्गजों ने दी बधाई

महेंद्र सिंह धोनी के 39वें जन्मदिन पर कई दिग्गज उन्हें बधाई दे रहे हैं। धोनी के इस जन्मदिन के मौके पर उन्हें ढेरों बधाई संदेश मिल रहे हैं।

देश जुड़ता है माही से…

वीवीएस लक्ष्मण ने दी बधाई कहा, धोनी का संयम है लोगों के लिए प्रेरणा

शेखर धवन ने भी दी बधाई

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