क्या होता है डी-एस्केलेशन ?, पूर्वी लद्दाख में LAC पर तनाव के बीच चीनी हरकत

भारत और चीन के संबंध इन दिनों ठीक नहीं चल रहे है। ऐसा कोई पहली बार नहीं है कि दोनों देशों के बीच के बीच टकराव चल रहा है। साल 1962 में भी दोनों देशों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था और फिर दोनों देश के बीच युद्ध भी हुई था। मगर बीते सोमवार की रात जो हुआ ऐसा कभी सोचा ना था। लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई और बिना गोली चले दोनों तरफ सैनिकों ने जान गंवा दी। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हुआ ? तो आज हम आपको ऐसे कुछ सवालों का जवाब देने आए है। इन सवालों के जवाब आपको फीडबाबा के जरिए से दिए जाएगे।

बीते सोमवार की रात लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई और बिना गोली चले दोनों तरफ सैनिकों ने जान गंवा दी। इसमें गद्दारी चीनी सेना की, क्योंकि इस साल मई-जून में चीन-भारत के बीच जो गतिरोध पैदा हुआ था उसे लेकर भारतीय सैन्‍य अधिकारियों ने उच्‍च स्‍तरीय वर्ता का पहल की थी। दोनों देशों के सैन्‍य अधिकारी आमने सामने बैठे थे जिसका मकसद था बॉर्डर पर डी-एस्केलेशन।

क्या है डी-एस्केलेशन ?

डी-एस्‍केलेशन का मतलब होता है 2 देशों के बीच तनाव की तीव्रता को कम करना। यानि की दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना। और शब्दों में बोल सकते है, कि दो देशों के बीच बन रहे युद्ध जैसे तनाव को कम करने के लिए जो कदम उठाया जाता है उसे डी- एस्‍केलेशन कहते हैं।

इससे पहले जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो भारत ने ये फैसला किया गया था कि भारतीय सैनिक गलवान घाटी, पैंगोंग सो, डेमचोक के सारे विवादित इलाकों में चीनी सैनिकों के आक्रामक अंदाज से निपटने के लिए कड़ा रुख अपनाएंगे बाद में चीन भारत के साथ उच्च स्तरीय बात के लिए तैयार हुआ और भारत चीन के बीच बैठक भी हुई। मगर दोनों सेना के बीच तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहे थे, तो बीते सोमवार की रात एक बार दोनों सेनाओं का आमना-सामना हुआ।

भारत-चीन सीमा पर हुई हिंसक झड़प को लेकर भारत की ओर से कहा गया कि ये घटना 15 जून की देर शाम लद्दाख की गलवान घाटी में तब हुई थी जब चीनी सैनिक द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करके भारतीय सीमा में घुस आए थे। इस घटना को टाला जा सकता था यदि चीन की ओर से समझौते का सम्मान किया जाता। प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भारतीय सेना ने 20 जवानों के शहीद होने की घोषणा की है। चीन ने शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।

गलवान वैली से पीछे हुए थे कुछ चीनी सैनिक

गलवान वैली में एक पॉइंट्स से चीनी सैनिक कुछ पीछे गए थे 2 जून को फिर भारत और चीन के बीच मेजर जनरल स्तर की मीटिंग हुई जिसमें गतिरोध दूर करने पर बात की गई। उसके बाद 3 जून को माहौल सकारात्मक बनाने के लिए गलवान वैली में एक पॉइंट्स से चीनी सैनिक कुछ पीछे गए।

6 जून को पहली बार भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई। इसमें गतिरोध के पॉइंट्स की पहचान की गई। पैंगोंग त्सो एरिया से पीछ हटने को चीन तैयार नहीं हुआ और तय हुआ कि गलवान वैली और हॉट स्प्रिंग एरिया में गतिरोध के तीन पॉइंट्स में धीरे-धीरे सैनिकों को पीछे किया जाएगा।

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