कोरोना का प्रकोप थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार ने कोरोना के कारण लगभग 65-70 दिन चले पूरे देश में लॉकडाउन लगाया था और अब अनलॉक-1 चल रहा है, जहां कई चीजों में छूट दे दी गई है, मगर अब भी स्कूल और कॉलेज पूर्ण तरह से बंद हैं।

स्कूलों में संस्थागत पढ़ाई पर रोक है और कई राज्यों में सरकारी और निजी स्कूल पूरी तरह बंद हैं, वहीं कई राज्यों के प्राइवेट स्कूल में छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। हालांकि प्राइवेट स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर छोटे से लेकर बड़े प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से ट्यूशन फीस के नाम पर अप्रैल, मई और जून की बढ़ी हुई फीस की वसूली कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय से लगा चुके हैं गुहार

लॉकडाउन के दौरान हरियाणा में अभिभावक एकता मंच, दिल्ली में दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन और दिल्ली ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लाईज, यूपी में तमाम अभिभावक और छात्र निजी तौर पर अपने-अपने यहां शिक्षा मंत्रालय से गुहार लगा चुके हैं।

अभिभावक ने स्कूल के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर की याचिका

बता दें, चंडीगढ़ के एक स्कूल के बैलेंसशीट न दिखाने और ज्यादा फीस लेने के मामले में 250 पेरेंट्स पहले ही एजुकेशन डिपार्टमेंट को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब एक अभिभावक ने स्कूल के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर की है। सेंट जोसेफ स्कूल सेक्टर-44 के खिलाफ हुई इस याचिका में अभिभावक ने यह कहा था, उनके 5 साल के बेटे ने इस साल स्कूल में एडमिशन लिया है और इसके लिए उन्होंने 30 हजार रुपए जमा करवाए।

बच्चा एक भी दिन स्कूल नहीं जा सका क्योंकि मार्च में ही स्कूल बंद हो गए थे। ऐसे में स्कूल उनसे हर महीने ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर फीस मांग रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत है, क्योंकि एडमिशन लेते समय ऑनलाइन एजुकेशन की डील नहीं हुई थी और कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से स्कूल ने एयरकंडीशंड स्मार्ट क्लासरूम में टीचिंग देने का वादा किया था।

कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के सेंट जोसेफ स्कूल को नोटिस जारी कर 3 जुलाई तक जवाब मांगा था। कोर्ट ने अपने आदेशों में लिखा है कि स्कूल को ई-मेल और वॉट्सएप द्वारा भी नोटिस भेजा जाए। वहीं, चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने ये कहा है कि सभी पेरेंट्स को मुफ्त कानूनी सहायता के साथ केस लडऩे में मदद करेगी।

याचिका में पेरेंट योगेंद्र ने कहा, स्कूल ने बताया था कि प्रशासन के निर्देशों के अनुसार उनका स्कूल सेकेंड क्लास तक कोई होमवर्क नहीं देगा। अब इससे उलटा हो गया है, क्योंकि होमवर्क ही नहीं क्लासवर्क भी पेरेंट को करवाना पड़ रहा है। ऑनलाइन क्लास में टीचर्स इतने छोटे बच्चे को पढ़ाने में सक्षम नहीं है और वह बच्चे की बजाय बच्चे के पेरेंट्स को ही कहते हैं कि इसे एल्फाबेट और नंबर लिखना सिखाएं। इसकी वजह से पेरेंट्स को अलग से स्मार्ट फोन का प्रबंध करना पड़ा है जो ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चे के लिए उपलब्ध रहे और दोनों में से एक पेरेंट्स को घर पर रहना पड़ता है, क्योंकि छोटा बच्चा खुद मोबाइल ऑपरेट नहीं कर सकता है।

साथ ही, याचिका में लिखा कि हमने स्कूल के साथ कॉन्ट्रैक्ट में कभी भी ऑनलाइन एजुकेशन की मांग नहीं की थी और न ही पांच साल के बच्चे के लिए ऑनलाइन एजुकेशन का कोई फायदा है। इससे बच्चों की आंखों और सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

केजी क्लास में सिलेबस को तवज्जो देने की बजाय स्कूल में शेयरिंग, केयरिंग सिखाई जाती है जो कि ऑनलाइन क्लास में संभव नहीं है। स्कूल अब तक कॉन्ट्रैक्ट के तहत अपनी सर्विसेज शुरू नहीं कर पाया है और पेरेंट्स को नोटिस भेजा जाता है कि हर महीने फीस जमा करवाएं वरना लेट फीस लगेगी। कॉन्ट्रैक्ट के कानून के तहत ग्राहक को सिर्फ उसी सेवा का भुगतान करना होता है जिसका उसने ऑर्डर किया हो।

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